aankh se dur na ho dil se utar jaega

aankh se dur na ho dil se utar jaega 

waqt ka kya hai guzarta hai guzar jaega 


itna manus na ho KHalwat-e-gham se apni 

tu kabhi KHud ko bhi dekhega to Dar jaega 


Dubte Dubte kashti ko uchhaala de dun 

main nahin koi to sahil pe utar jaega 


zindagi teri ata hai to ye jaane wala 

teri baKHshish teri dahliz pe dhar jaega 


zabt lazim hai magar dukh hai qayamat ka 'faraaz' 

zalim ab ke bhi na roega to mar jaega 

آنکھ سے دور نہ ہو دل سے اتر جائے گا 

وقت کا کیا ہے گزرتا ہے گزر جائے گا 


اتنا مانوس نہ ہو خلوت غم سے اپنی 

تو کبھی خود کو بھی دیکھے گا تو ڈر جائے گا 


ڈوبتے ڈوبتے کشتی کو اچھالا دے دوں 

میں نہیں کوئی تو ساحل پہ اتر جائے گا 


زندگی تیری عطا ہے تو یہ جانے والا 

تیری بخشش تری دہلیز پہ دھر جائے گا 


ضبط لازم ہے مگر دکھ ہے قیامت کا فرازؔ 

ظالم اب کے بھی نہ روئے گا تو مر جائے گا 

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा 

वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा 


इतना मानूस न हो ख़ल्वत-ए-ग़म से अपनी 

तू कभी ख़ुद को भी देखेगा तो डर जाएगा 


डूबते डूबते कश्ती को उछाला दे दूँ 

मैं नहीं कोई तो साहिल पे उतर जाएगा 


ज़िंदगी तेरी अता है तो ये जाने वाला 

तेरी बख़्शिश तिरी दहलीज़ पे धर जाएगा 


ज़ब्त लाज़िम है मगर दुख है क़यामत का 'फ़राज़' 

ज़ालिम अब के भी न रोएगा तो मर जाएगा 


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