chal nikalti hain gham-e-yar se baaten kya kya

chal nikalti hain gham-e-yar se baaten kya kya 

hum ne bhi kin dar-o-diwar se baaten kya kya 


baat ban aai hai phir se ki mere bare mein 

us ne puchhin mere gham-KHwar se baaten kya kya 


log lab-basta agar hon to nikal aati hain 

chup ke pairaya-e-izhaar se baaten kya kya 


kisi saudai ka qissa kisi harjai ki baat 

log le aate hain bazar se baaten kya kya 


hum ne bhi dast-shanasi ke bahane ki hain 

hath mein hath liye pyar se baaten kya kya 


kis ko bikna tha magar KHush hain ki is hile se 

ho gain apne KHaridar se baaten kya kya 


hum hain KHamosh ki majbur-e-mohabbat the 'faraaz' 

warna mansub hain sarkar se baaten kya kya 

چل نکلتی ہیں غم یار سے باتیں کیا کیا 

ہم نے بھی کیں در و دیوار سے باتیں کیا کیا 


بات بن آئی ہے پھر سے کہ مرے بارے میں 

اس نے پوچھیں مرے غم خوار سے باتیں کیا کیا 


لوگ لب بستہ اگر ہوں تو نکل آتی ہیں 

چپ کے پیرایۂ اظہار سے باتیں کیا کیا 


کسی سودائی کا قصہ کسی ہرجائی کی بات 

لوگ لے آتے ہیں بازار سے باتیں کیا کیا 


ہم نے بھی دست شناسی کے بہانے کی ہیں 

ہاتھ میں ہاتھ لیے پیار سے باتیں کیا کیا 


کس کو بکنا تھا مگر خوش ہیں کہ اس حیلے سے 

ہو گئیں اپنے خریدار سے باتیں کیا کیا 


ہم ہیں خاموش کہ مجبور محبت تھے فرازؔ 

ورنہ منسوب ہیں سرکار سے باتیں کیا کیا 

चल निकलती हैं ग़म-ए-यार से बातें क्या क्या 

हम ने भी कीं दर-ओ-दीवार से बातें क्या क्या 


बात बन आई है फिर से कि मिरे बारे में 

उस ने पूछीं मिरे ग़म-ख़्वार से बातें क्या क्या 


लोग लब-बस्ता अगर हों तो निकल आती हैं 

चुप के पैराया-ए-इज़हार से बातें क्या क्या 


किसी सौदाई का क़िस्सा किसी हरजाई की बात 

लोग ले आते हैं बाज़ार से बातें क्या क्या 


हम ने भी दस्त-शनासी के बहाने की हैं 

हाथ में हाथ लिए प्यार से बातें क्या क्या 


किस को बिकना था मगर ख़ुश हैं कि इस हीले से 

हो गईं अपने ख़रीदार से बातें क्या क्या 


हम हैं ख़ामोश कि मजबूर-ए-मोहब्बत थे 'फ़राज़' 

वर्ना मंसूब हैं सरकार से बातें क्या क्या 


SOURCE :

Book :

Edition :

Publication :

Advertizement


Coments