Dil Pareshan Hai Kya Kiya Jae

Dil Pareshan Hai Kya Kiya Jae

Aql Hairan Hai Kya Kiya Jae


Shauq-e-mushkil-pasand Un Ka Husul

Sakht Aasan Hai Kya Kiya Jae


Ishq-e-khuban Ke Sath Hi Hum Mein

Naz-e-khuban Hai Kya Kiya Jae


Be-sabab Hi Meri Tabiat-e-gham

Sab Se Nalan Hai Kya Kiya Jae


Bawajud Un Ki Dil-nawazi Ke

Dil Gurezan Hai Kya Kiya Jae


Main To Naqd-e-hayat Laya Tha

Jins-e-arzan Hai Kya Kiya Jae


Hum Samajhte The Ishq Ko Dushwar

Ye Bhi Aasan Hai Kya Kiya Jae


Wo Bahaaron Ki Naz-parwarda

Hum Pe Nazan Hai Kya Kiya Jae


Misr-e-lutf-o-karam Mein Bhi Ai 'jaun'

Yaad-e-kanan Hai Kya Kiya Jae

دل پریشاں ہے کیا کیا جائے 

عقل حیراں ہے کیا کیا جائے 


شوق مشکل پسند ان کا حصول 

سخت آساں ہے کیا کیا جائے 


عشق خوباں کے ساتھ ہی ہم میں 

ناز خوباں ہے کیا کیا جائے 


بے سبب ہی مری طبیعت غم 

سب سے نالاں ہے کیا کیا جائے 


باوجود ان کی دل نوازی کے 

دل گریزاں ہے کیا کیا جائے 


میں تو نقد حیات لایا تھا 

جنس ارزاں ہے کیا کیا جائے 


ہم سمجھتے تھے عشق کو دشوار 

یہ بھی آساں ہے کیا کیا جائے 


وہ بہاروں کی ناز پروردہ 

ہم پہ نازاں ہے کیا کیا جائے 


مصر لطف و کرم میں بھی اے جونؔ 

یاد کنعاں ہے کیا کیا جائے 

दिल परेशाँ है क्या किया जाए 

अक़्ल हैराँ है क्या किया जाए 


शौक़-ए-मुश्किल-पसंद उन का हुसूल 

सख़्त आसाँ है क्या किया जाए 


इश्क़-ए-ख़ूबाँ के साथ ही हम में 

नाज़-ए-ख़ूबाँ है क्या किया जाए 


बे-सबब ही मिरी तबीअत-ए-ग़म 

सब से नालाँ है क्या किया जाए 


बावजूद उन की दिल-नवाज़ी के 

दिल गुरेज़ाँ है क्या किया जाए 


मैं तो नक़्द-ए-हयात लाया था 

जिंस-ए-अर्ज़ां है क्या किया जाए 


हम समझते थे इश्क़ को दुश्वार 

ये भी आसाँ है क्या किया जाए 


वो बहारों की नाज़-पर्वर्दा 

हम पे नाज़ाँ है क्या किया जाए 


मिस्र-ए-लुत्फ़-ओ-करम में भी ऐ 'जौन' 

याद-ए-कनआँ है क्या किया जाए 


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