Har Ghazal Ek Ghazal Ki Hogi

Guftugu Jab Muhaal Ki Hogi

Baat Us Ki Misal Ki Hogi


Zindagi Hai Khayal Ki Ek Baat

Jo Kisi Be-khayal Ki Hogi


Thi Jo Khushbu Saba Ki Chadar Mein

Wo Tumhaari Hi Shaal Ki Hogi


Na Samajh Paenge Wo Ahl-e-firaq

Jo Aziyyat Visal Ki Hogi


Dil Pe Tari Hai Ek Kamal-e-khushi

Shayad Apne Zawal Ki Hogi


Jo Ata Ho Visal-e-jaanan Ki

Wo Udasi Kamal Ki Hogi


Aaj Kahna Hai Dil Ko Haal Apna

Aaj To Sab Ke Haal Ki Hogi


Ho Chuka Main So Fikr Yaron Ko

Ab Meri Dekh-bhaal Ki Hogi


Ab Khalish Kya Firaq Ki Us Ke

Ek Khalish Mah-o-sal Ki Hogi


Kufr-o-iman Kaha Gaya Jis Ko

Baat Wo Khadd-o-khal Ki Hogi


'jaun' Dil Ke Khutan Mein Aaya Hai

Har Ghazal Ek Ghazal Ki Hogi


Kab Bhala Aaegi Jawab Ko Ras

Jo Bhi Haalat Sawal Ki Hogi

گفتگو جب محال کی ہوگی 

بات اس کی مثال کی ہوگی 


زندگی ہے خیال کی اک بات 

جو کسی بے خیال کی ہوگی 


تھی جو خوشبو صبا کی چادر میں 

وہ تمہاری ہی شال کی ہوگی 


نہ سمجھ پائیں گے وہ اہل فراق 

جو اذیت وصال کی ہوگی 


دل پہ طاری ہے اک کمال خوشی 

شاید اپنے زوال کی ہوگی 


جو عطا ہو وصال جاناں کی 

وہ اداسی کمال کی ہوگی 


آج کہنا ہے دل کو حال اپنا 

آج تو سب کے حال کی ہوگی 


ہو چکا میں سو فکر یاروں کو 

اب مری دیکھ بھال کی ہوگی 


اب خلش کیا فراق کی اس کے 

اک خلش ماہ و سال کی ہوگی 


کفر و ایماں کہا گیا جس کو 

بات وہ خد و خال کی ہوگی 


جونؔ دل کے ختن میں آیا ہے 

ہر غزل اک غزال کی ہوگی 


کب بھلا آئے گی جواب کو راس 

جو بھی حالت سوال کی ہوگی 

गुफ़्तुगू जब मुहाल की होगी 

बात उस की मिसाल की होगी 


ज़िंदगी है ख़याल की इक बात 

जो किसी बे-ख़याल की होगी 


थी जो ख़ुश्बू सबा की चादर में 

वो तुम्हारी ही शाल की होगी 


न समझ पाएँगे वो अहल-ए-फ़िराक़ 

जो अज़िय्यत विसाल की होगी 


दिल पे तारी है इक कमाल-ए-ख़ुशी 

शायद अपने ज़वाल की होगी 


जो अता हो विसाल-ए-जानाँ की 

वो उदासी कमाल की होगी 


आज कहना है दिल को हाल अपना 

आज तो सब के हाल की होगी 


हो चुका मैं सो फ़िक्र यारों को 

अब मिरी देख-भाल की होगी 


अब ख़लिश क्या फ़िराक़ की उस के 

इक ख़लिश माह-ओ-साल की होगी 


कुफ़्र-ओ-ईमाँ कहा गया जिस को 

बात वो ख़द्द-ओ-ख़ाल की होगी 


'जौन' दिल के ख़ुतन में आया है 

हर ग़ज़ल इक ग़ज़ाल की होगी 


कब भला आएगी जवाब को रास 

जो भी हालत सवाल की होगी 


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