ji hi ji mein wo jal rahi hogi

ji hi ji mein wo jal rahi hogi 

chandni mein Tahal rahi hogi 


chand ne tan li hai chadar-e-abr 

ab wo kapDe badal rahi hogi 


so gai hogi wo shafaq-andam 

sabz qindil jal rahi hogi 


surKH aur sabz wadiyon ki taraf 

wo mere sath chal rahi hogi 


chaDhte chaDhte kisi pahaDi par 

ab wo karwaT badal rahi hogi 


peD ki chhaal se ragaD kha kar 

wo tane se phisal rahi hogi 


nil-gun jhil naf tak pahne 

sandalin jism mal rahi hogi 


ho ke wo KHwab-e-aish se bedar 

kitni hi der shal rahi hogi 


جی ہی جی میں وہ جل رہی ہوگی 

چاندنی میں ٹہل رہی ہوگی 


چاند نے تان لی ہے چادر ابر 

اب وہ کپڑے بدل رہی ہوگی 


سو گئی ہوگی وہ شفق اندام 

سبز قندیل جل رہی ہوگی 


سرخ اور سبز وادیوں کی طرف 

وہ مرے ساتھ چل رہی ہوگی 


چڑھتے چڑھتے کسی پہاڑی پر 

اب وہ کروٹ بدل رہی ہوگی 


پیڑ کی چھال سے رگڑ کھا کر 

وہ تنے سے پھسل رہی ہوگی 


نیلگوں جھیل ناف تک پہنے 

صندلیں جسم مل رہی ہوگی 


ہو کے وہ خواب عیش سے بیدار 

کتنی ہی دیر شل رہی ہوگی 


जी ही जी में वो जल रही होगी 

चाँदनी में टहल रही होगी 


चाँद ने तान ली है चादर-ए-अब्र 

अब वो कपड़े बदल रही होगी 


सो गई होगी वो शफ़क़-अंदाम 

सब्ज़ क़िंदील जल रही होगी 


सुर्ख़ और सब्ज़ वादियों की तरफ़ 

वो मिरे साथ चल रही होगी 


चढ़ते चढ़ते किसी पहाड़ी पर 

अब वो करवट बदल रही होगी 


पेड़ की छाल से रगड़ खा कर 

वो तने से फिसल रही होगी 


नील-गूँ झील नाफ़ तक पहने 

संदलीं जिस्म मल रही होगी 


हो के वो ख़्वाब-ए-ऐश से बेदार 

कितनी ही देर शल रही होगी 



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