kaise unhen bhulaun mohabbat jinhon ne ki

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kaise unhen bhulaun mohabbat jinhon ne ki 

mujh ko to wo bhi yaad hain nafrat jinhon ne ki 


duniya mein ehtiram ke qabil wo log hain 

ai zillat-e-wafa teri izzat jinhon ne ki 


tazin-e-kaenat ka bais wahi bane 

duniya se iKHtilaf ki jurat jinhon ne ki 


aasudgan-e-manzil-e-laila udas hain 

achchhe rahe, na tai ye masafat jinhon ne ki 


ahl-e-hawas to KHair hawas mein hue zalil 

wo bhi hue KHarab, mohabbat jinhon ne ki 

کیسے انہیں بھلاؤں محبت جنہوں نے کی 

مجھ کو تو وہ بھی یاد ہیں نفرت جنہوں نے کی 


دنیا میں احترام کے قابل وہ لوگ ہیں 

اے ذلت وفا تری عزت جنہوں نے کی 


تزئین کائنات کا باعث وہی بنے 

دنیا سے اختلاف کی جرأت جنہوں نے کی 


آسودگان منزل لیلیٰ اداس ہیں 

اچھے رہے نہ طے یہ مسافت جنہوں نے کی 


اہل ہوس تو خیر ہوس میں ہوئے ذلیل 

وہ بھی ہوئے خراب محبت جنہوں نے کی 

कैसे उन्हें भुलाऊँ मोहब्बत जिन्हों ने की 

मुझ को तो वो भी याद हैं नफ़रत जिन्हों ने की 


दुनिया में एहतिराम के क़ाबिल वो लोग हैं 

ऐ ज़िल्लत-ए-वफ़ा तिरी इज़्ज़त जिन्हों ने की 


तज़ईन-ए-काएनात का बाइस वही बने 

दुनिया से इख़्तिलाफ़ की जुरअत जिन्हों ने की 


आसूदगान-ए-मंजि़ल-ए-लैला उदास हैं 

अच्छे रहे न तय ये मसाफ़त जिन्हों ने की 


अहल-ए-हवस तो ख़ैर हवस में हुए ज़लील 

वो भी हुए ख़राब, मोहब्बत जिन्हों ने की 


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