kis shai pe yahan waqt ka saya nahin hota

kis shai pe yahan waqt ka saya nahin hota 

ek KHwab-e-mohabbat hai ki buDha nahin hota 


wo waqt bhi aata hai jab aankhon mein hamari 

phirti hain wo shaklen jinhen dekha nahin hota 


barish wo barasti hai ki bhar jate hain jal-thal 

dekho to kahin abr ka TukDa nahin hota 


ghir jata hai dil dard ki har band gali mein 

chaho ki nikal jaen to rasta nahin hota 


yaadon pe bhi jam jati hai jab gard-e-zamana 

milta hai wo paigham ki pahuncha nahin hota 


tanhai mein karni to hai ek baat kisi se 

lekin wo kisi waqt akela nahin hota 


kya us se gila kijiye barbaadi-e-dil ka 

hum se bhi to izhaar-e-tamanna nahin hota 

کس شے پہ یہاں وقت کا سایہ نہیں ہوتا 

اک خواب محبت ہے کہ بوڑھا نہیں ہوتا 


وہ وقت بھی آتا ہے جب آنکھوں میں ہماری 

پھرتی ہیں وہ شکلیں جنہیں دیکھا نہیں ہوتا 


بارش وہ برستی ہے کہ بھر جاتے ہیں جل تھل 

دیکھو تو کہیں ابر کا ٹکڑا نہیں ہوتا 


گھر جاتا ہے دل درد کی ہر بند گلی میں 

چاہو کہ نکل جائیں تو رستہ نہیں ہوتا 


یادوں پہ بھی جم جاتی ہے جب گرد زمانہ 

ملتا ہے وہ پیغام کہ پہنچا نہیں ہوتا 


تنہائی میں کرنی تو ہے اک بات کسی سے 

لیکن وہ کسی وقت اکیلا نہیں ہوتا 


کیا اس سے گلہ کیجیئے بربادئ دل کا 

ہم سے بھی تو اظہار تمنا نہیں ہوتا 

किस शय पे यहाँ वक़्त का साया नहीं होता 

इक ख़्वाब-ए-मोहब्बत है कि बूढ़ा नहीं होता 


वो वक़्त भी आता है जब आँखों में हमारी 

फिरती हैं वो शक्लें जिन्हें देखा नहीं होता 


बारिश वो बरसती है कि भर जाते हैं जल-थल 

देखो तो कहीं अब्र का टुकड़ा नहीं होता 


घिर जाता है दिल दर्द की हर बंद गली में 

चाहो कि निकल जाएँ तो रस्ता नहीं होता 


यादों पे भी जम जाती है जब गर्द-ए-ज़माना 

मिलता है वो पैग़ाम कि पहुँचा नहीं होता 


तन्हाई में करनी तो है इक बात किसी से 

लेकिन वो किसी वक़्त अकेला नहीं होता 


क्या उस से गिला कीजिए बर्बादी-ए-दिल का 

हम से भी तो इज़्हार-ए-तमन्ना नहीं होता 


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