kyun na hum ahd-e-rifaqat ko bhulane lag jaen

kyun na hum ahd-e-rifaqat ko bhulane lag jaen 

shayad is zaKHm ko bharne mein zamane lag jaen 


nahin aisa bhi ki ek umr ki qurbat ke nashe 

ek do roz ki ranjish se Thikane lag jaen 


yahi naseh jo hamein tujh se na milne ko kahen 

tujh ko dekhen to tujhe dekhne aane lag jaen 


hum ki hain lazzat-e-azar ke mare hue log 

chaaragar aaen to zaKHmon ko chhupane lag jaen 


rabt ke sainkaDon hile hain mohabbat na sahi 

hum tere sath kisi aur bahane lag jaen 


saqiya masjid o maktab to nahin mai-KHana 

dekhna phir bhi ghalat log na aane lag jaen 


qurb achchha hai magar itni bhi shiddat se na mil 

ye na ho tujh ko mere rog purane lag jaen 


ab 'faraaz' aao chalen apne qabile ki taraf 

shairi tark karen bojh uThane lag jaen 

کیوں نہ ہم عہد رفاقت کو بھلانے لگ جائیں 

شاید اس زخم کو بھرنے میں زمانے لگ جائیں 


نہیں ایسا بھی کہ اک عمر کی قربت کے نشے 

ایک دو روز کی رنجش سے ٹھکانے لگ جائیں 


یہی ناصح جو ہمیں تجھ سے نہ ملنے کو کہیں 

تجھ کو دیکھیں تو تجھے دیکھنے آنے لگ جائیں 


ہم کہ ہیں لذت آزار کے مارے ہوئے لوگ 

چارہ گر آئیں تو زخموں کو چھپانے لگ جائیں 


ربط کے سینکڑوں حیلے ہیں محبت نہ سہی 

ہم ترے ساتھ کسی اور بہانے لگ جائیں 


ساقیا مسجد و مکتب تو نہیں مے خانہ 

دیکھنا پھر بھی غلط لوگ نہ آنے لگ جائیں 


قرب اچھا ہے مگر اتنی بھی شدت سے نہ مل 

یہ نہ ہو تجھ کو مرے روگ پرانے لگ جائیں 


اب فرازؔ آؤ چلیں اپنے قبیلے کی طرف 

شاعری ترک کریں بوجھ اٹھانے لگ جائیں 

क्यूँ न हम अहद-ए-रिफ़ाक़त को भुलाने लग जाएँ 

शायद इस ज़ख़्म को भरने में ज़माने लग जाएँ 


नहीं ऐसा भी कि इक उम्र की क़ुर्बत के नशे 

एक दो रोज़ की रंजिश से ठिकाने लग जाएँ 


यही नासेह जो हमें तुझ से न मिलने को कहें 

तुझ को देखें तो तुझे देखने आने लग जाएँ 


हम कि हैं लज़्ज़त-ए-आज़ार के मारे हुए लोग 

चारागर आएँ तो ज़ख़्मों को छुपाने लग जाएँ 


रब्त के सैंकड़ों हीले हैं मोहब्बत न सही 

हम तिरे साथ किसी और बहाने लग जाएँ 


साक़िया मस्जिद ओ मकतब तो नहीं मय-ख़ाना 

देखना फिर भी ग़लत लोग न आने लग जाएँ 


क़ुर्ब अच्छा है मगर इतनी भी शिद्दत से न मिल 

ये न हो तुझ को मिरे रोग पुराने लग जाएँ 


अब 'फ़राज़' आओ चलें अपने क़बीले की तरफ़ 

शाइ'री तर्क करें बोझ उठाने लग जाएँ 


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