mustaqil mahrumiyon par bhi to dil mana nahin

mustaqil mahrumiyon par bhi to dil mana nahin 

lakh samjhaya ki is mahfil mein ab jaana nahin 


KHud-farebi hi sahi kya kijiye dil ka ilaj 

tu nazar phere to hum samjhen ki pahchana nahin 


ek duniya muntazir hai aur teri bazm mein 

is tarah baiThe hain hum jaise kahin jaana nahin 


ji mein jo aati hai kar guzro kahin aisa na ho 

kal pasheman hon ki kyun dil ka kaha mana nahin 


zindagi par is se baDh kar tanz kya hoga 'faraaz' 

us ka ye kahna ki tu shaer hai diwana nahin 

مستقل محرومیوں پر بھی تو دل مانا نہیں 

لاکھ سمجھایا کہ اس محفل میں اب جانا نہیں 


خود فریبی ہی سہی کیا کیجئے دل کا علاج 

تو نظر پھیرے تو ہم سمجھیں کہ پہچانا نہیں 


ایک دنیا منتظر ہے اور تیری بزم میں 

اس طرح بیٹھے ہیں ہم جیسے کہیں جانا نہیں 


جی میں جو آتی ہے کر گزرو کہیں ایسا نہ ہو 

کل پشیماں ہوں کہ کیوں دل کا کہا مانا نہیں 


زندگی پر اس سے بڑھ کر طنز کیا ہوگا فرازؔ 

اس کا یہ کہنا کہ تو شاعر ہے دیوانا نہیں 

मुस्तक़िल महरूमियों पर भी तो दिल माना नहीं 

लाख समझाया कि इस महफ़िल में अब जाना नहीं 


ख़ुद-फ़रेबी ही सही क्या कीजिए दिल का इलाज 

तू नज़र फेरे तो हम समझें कि पहचाना नहीं 


एक दुनिया मुंतज़िर है और तेरी बज़्म में 

इस तरह बैठे हैं हम जैसे कहीं जाना नहीं 


जी में जो आती है कर गुज़रो कहीं ऐसा न हो 

कल पशेमाँ हों कि क्यूँ दिल का कहा माना नहीं 


ज़िंदगी पर इस से बढ़ कर तंज़ क्या होगा 'फ़राज़' 

उस का ये कहना कि तू शाएर है दीवाना नहीं 


SOURCE :

Book :

Edition :

Publication :

Advertizement


Coments