na harif-e-jaan na sharik-e-gham shab-e-intizar koi to ho

na harif-e-jaan na sharik-e-gham shab-e-intizar koi to ho 

kise bazm-e-shauq mein laen hum dil-e-be-qarar koi to ho 


kise zindagi hai aziz ab kise aarzu-e-shab-e-tarab 

magar ai nigar-e-wafa talab tera e'tibar koi to ho 


kahin tar-e-daman-e-gul mile to ye man len ki chaman khile 

ki nishan fasl-e-bahaar ka sar-e-shaKH-sar koi to ho 


ye udas udas se baam o dar ye ujaD ujaD si rah-guzar 

chalo hum nahin na sahi magar sar-e-ku-e-yar koi to ho 


ye sukun-e-jaan ki ghaDi Dhale to charagh-e-dil hi na bujh chale 

wo bala se ho gham-e-ishq ya gham-e-rozgar koi to ho 


sar-e-maqtal-e-shab-e-arzu rahe kuchh to ishq ki aabru 

jo nahin adu to 'faraaz' tu ki nasib-e-dar koi to ho 

نہ حریف جاں نہ شریک غم شب انتظار کوئی تو ہو 

کسے بزم شوق میں لائیں ہم دل بے قرار کوئی تو ہو 


کسے زندگی ہے عزیز اب کسے آرزوئے شب طرب 

مگر اے نگار وفا طلب ترا اعتبار کوئی تو ہو 


کہیں تار دامن گل ملے تو یہ مان لیں کہ چمن کھلے 

کہ نشان فصل بہار کا سر شاخسار کوئی تو ہو 


یہ اداس اداس سے بام و در یہ اجاڑ اجاڑ سی رہگزر 

چلو ہم نہیں نہ سہی مگر سر کوئے یار کوئی تو ہو 


یہ سکون جاں کی گھڑی ڈھلے تو چراغ دل ہی نہ بجھ چلے 

وہ بلا سے ہو غم عشق یا غم روزگار کوئی تو ہو 


سر مقتل شب آرزو رہے کچھ تو عشق کی آبرو 

جو نہیں عدو تو فرازؔ تو کہ نصیب دار کوئی تو ہو 

न हरीफ़-ए-जाँ न शरीक-ए-ग़म शब-ए-इंतिज़ार कोई तो हो 

किसे बज़्म-ए-शौक़ में लाएँ हम दिल-ए-बे-क़रार कोई तो हो 


किसे ज़िंदगी है अज़ीज़ अब किसे आरज़ू-ए-शब-ए-तरब 

मगर ऐ निगार-ए-वफ़ा तलब तिरा ए'तिबार कोई तो हो 


कहीं तार-ए-दामन-ए-गुल मिले तो ये मान लें कि चमन खिले 

कि निशान फ़स्ल-ए-बहार का सर-ए-शाख़-सार कोई तो हो 


ये उदास उदास से बाम ओ दर ये उजाड़ उजाड़ सी रह-गुज़र 

चलो हम नहीं न सही मगर सर-ए-कू-ए-यार कोई तो हो 


ये सुकून-ए-जाँ की घड़ी ढले तो चराग़-ए-दिल ही न बुझ चले 

वो बला से हो ग़म-ए-इश्क़ या ग़म-ए-रोज़गार कोई तो हो 


सर-ए-मक़्तल-ए-शब-ए-आरज़ू रहे कुछ तो इश्क़ की आबरू 

जो नहीं अदू तो 'फ़राज़' तू कि नसीब-ए-दार कोई तो हो 


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