yaad use intihai karte hain

yaad use intihai karte hain 

so hum us ki burai karte hain 


pasand aata hai dil se yusuf ko 

wo jo yusuf ke bhai karte hain 


hai badan KHwab-e-wasl ka danggal 

aao zor-azmai karte hain 


us ko aur ghair ko KHabar hi nahin 

hum lagai bujhai karte hain 


hum ajab hain ki us ki banhon mein 

shikwa-e-narasai karte hain 


haalat-e-wasl mein bhi hum donon 

lamha lamha judai karte hain 


aap jo meri jaan hain main dil hun 

mujh se kaise judai karte hain 


ba-wafa ek dusre se miyan 

har-nafas bewafai karte hain 


jo hain sarhad ke par se aae 

wo bahut KHud-satai karte hain 


pal qayamat ke sud-KHwar hain 'jaun' 

ye abad ki kamai karte hain 

یاد اسے انتہائی کرتے ہیں 

سو ہم اس کی برائی کرتے ہیں 


پسند آتا ہے دل سے یوسف کو 

وہ جو یوسف کے بھائی کرتے ہیں 


ہے بدن خواب وصل کا دنگل 

آؤ زور آزمائی کرتے ہیں 


اس کو اور غیر کو خبر ہی نہیں 

ہم لگائی بجھائی کرتے ہیں 


ہم عجب ہیں کہ اس کی بانہوں میں 

شکوۂ نارسائی کرتے ہیں 


حالت وصل میں بھی ہم دونوں 

لمحہ لمحہ جدائی کرتے ہیں 


آپ جو میری جاں ہیں میں دل ہوں 

مجھ سے کیسے جدائی کرتے ہیں 


با وفا ایک دوسرے سے میاں 

ہر نفس بے وفائی کرتے ہیں 


جو ہیں سرحد کے پار سے آئے 

وہ بہت خود ستائی کرتے ہیں 


پل قیامت کے سود خوار ہیں جونؔ 

یہ ابد کی کمائی کرتے ہیں 

याद उसे इंतिहाई करते हैं 

सो हम उस की बुराई करते हैं 


पसंद आता है दिल से यूसुफ़ को 

वो जो यूसुफ़ के भाई करते हैं 


है बदन ख़्वाब-ए-वस्ल का दंगल 

आओ ज़ोर-आज़माई करते हैं 


उस को और ग़ैर को ख़बर ही नहीं 

हम लगाई बुझाई करते हैं 


हम अजब हैं कि उस की बाँहों में 

शिकवा-ए-नारसाई करते हैं 


हालत-ए-वस्ल में भी हम दोनों 

लम्हा लम्हा जुदाई करते हैं 


आप जो मेरी जाँ हैं मैं दिल हूँ 

मुझ से कैसे जुदाई करते हैं 


बा-वफ़ा एक दूसरे से मियाँ 

हर-नफ़स बेवफ़ाई करते हैं 


जो हैं सरहद के पार से आए 

वो बहुत ख़ुद-सताई करते हैं 


पल क़यामत के सूद-ख़्वार हैं 'जौन' 

ये अबद की कमाई करते हैं 


SOURCE :

Book : Gumaan (Poetry) (Pg. 89)

Edition : 2012

Publication : Takhleeqar Publishers (2012)

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