zindagi kya hai ek kahani hai

zindagi kya hai ek kahani hai 

ye kahani nahin sunani hai 


hai KHuda bhi ajib yani jo 

na zamini na aasmani hai 


hai mere shauq-e-wasl ko ye gila 

us ka pahlu sara-e-fani hai 


apni tamir-e-jaan-o-dil ke liye 

apni buniyaad hum ko Dhani hai 


ye hai lamhon ka ek shahr-e-azal 

yan ki har baat na-gahani hai 


chaliye ai jaan-e-sham aaj tumhein 

shama ek qabr par jalani hai 


rang ki apni baat hai warna 

aaKHirash KHun bhi to pani hai 


ek abas ka wajud hai jis se 

zindagi ko murad pani hai 


sham hai aur sahn mein dil ke 

ek ajab huzn-e-asmani hai 

زندگی کیا ہے اک کہانی ہے 

یہ کہانی نہیں سنانی ہے 


ہے خدا بھی عجیب یعنی جو 

نہ زمینی نہ آسمانی ہے 


ہے مرے شوق وصل کو یہ گلہ 

اس کا پہلو سرائے فانی ہے 


اپنی تعمیر جان و دل کے لیے 

اپنی بنیاد ہم کو ڈھانی ہے 


یہ ہے لمحوں کا ایک شہر ازل 

یاں کی ہر بات ناگہانی ہے 


چلیے اے جان شام آج تمہیں 

شمع اک قبر پر جلانی ہے 


رنگ کی اپنی بات ہے ورنہ 

آخرش خون بھی تو پانی ہے 


اک عبث کا وجود ہے جس سے 

زندگی کو مراد پانی ہے 


شام ہے اور صحن میں دل کے 

اک عجب حزن آسمانی ہے 

ज़िंदगी क्या है इक कहानी है 

ये कहानी नहीं सुनानी है 


है ख़ुदा भी अजीब या'नी जो 

न ज़मीनी न आसमानी है 


है मिरे शौक़-ए-वस्ल को ये गिला 

उस का पहलू सरा-ए-फ़ानी है 


अपनी तामीर-ए-जान-ओ-दिल के लिए 

अपनी बुनियाद हम को ढानी है 


ये है लम्हों का एक शहर-ए-अज़ल 

याँ की हर बात ना-गहानी है 


चलिए ऐ जान-ए-शाम आज तुम्हें 

शम्अ इक क़ब्र पर जलानी है 


रंग की अपनी बात है वर्ना 

आख़िरश ख़ून भी तो पानी है 


इक अबस का वजूद है जिस से 

ज़िंदगी को मुराद पानी है 


शाम है और सहन में दिल के 

इक अजब हुज़न-ए-आसमानी है 


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